नसीहतों की ‘झालमुरी’ और सत्ता की ‘मलाई’

​लेखक: राजेश निगम, इंदौर

​आज नुक्कड़ वाली ‘झालमुरी वाली अम्मा’ का पारा सातवें आसमान पर था। हाथ में अखबार की वह कतरन थी, जिसमें देश के ‘प्रधान’ सेवक ने जनता से 12 अपीलों की झड़ी लगा दी थी। अम्मा ने अपनी टोकरी एक तरफ रखी, चश्मा नाक पर टिकाया और जोर से ठहाका मारकर बोली: “अरे भाई! ये तो वही बात हुई कि खुद तो बंगाल में ‘झालमुड़ी’ पेल-पेल कर खा रहे थे और अब हमें कह रहे हैं कि बेटा, देश हित में अपना पेट काटो और व्रत रखो!”
​अम्मा ने अखबार मेज पर पटका और साहेब से सीधे सवालों की झड़ी लगा दी:
​”साहेब! आप कहते हैं पेट्रोल बचाओ, तो क्या ये मंत्रियों की 100-100 गाड़ियों का लवाजमा गंगाजल से चलता है? क्या आपके रोड-शो में गाड़ियां नहीं, बैलगाड़ियां चलती हैं?”
​”कहते हैं विदेश यात्रा टाल दो, तो क्या आपका वो चमचमाता फाइव-स्टार विमान केवल रनवे की शोभा बढ़ाने के लिए है? क्या आपके समझौते ‘ऑनलाइन’ नहीं हो सकते?”


​”जनता से कहते हैं कारपूलिंग करो, तो क्या देश के मंत्री और सांसद रेलवे के स्लीपर कोच में सफर करके एक मिसाल नहीं पेश कर सकते?”
​”शादी में सोना न खरीदने की सलाह देने वालों, क्या कभी अपनी पार्टी के नेताओं की शादियों की ‘शाही’ चमक देखी है? गरीब की पूंजी पर नज़र क्यों, साहेब?”
​”उद्घाटन और शिलान्यास के लिए करोड़ों का तेल फूंक कर उड़ना क्या जरूरी है? क्या आपकी डिजिटल इंडिया की ताकत केवल विज्ञापनों तक सीमित है? क्या कैंची ऑनलाइन नहीं चल सकती?”
​अम्मा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, “शास्त्री जी याद हैं? जब देश पर संकट आया तो उन्होंने खुद भी एक वक्त का खाना छोड़ा था। उनके घर का चूल्हा ठंडा रहता था तब जनता ने पेट पर पट्टी बांधी थी। पर यहाँ तो मामला ही उल्टा है। नसीहत जनता के लिए ‘रूखी-सूखी’ वाली है और खुद का सफर ‘हवाई’ है।”


​अम्मा आगे बोली: “जिस राहुल गांधी को ‘पप्पू’ बताने में आपने करोड़ों फूंक दिए, आज उन्हीं की आशंकाएं सच साबित हो रही हैं। जब वो चिल्ला रहे थे तब तो आप चुनावी डुगडुगी पीट रहे थे और कह रहे थे कि हमारे पास पर्याप्त भंडार है। अब अचानक बचत की याद आ गई?”
​अम्मा ने अपनी पोटली बांधते हुए आखिरी कड़क सवाल दागा: “क्या सादगी का सारा बोझ केवल राशन की कतार में खड़े 80 करोड़ लोगों के कंधों पर है? साहेब, जनता को उपदेश देने से पहले क्या आप और आपका मंत्रिमंडल अपनी ही दी हुई शिक्षा पर चार कदम चलकर दिखाएगा? या फिर ये सब भी पिछले जुमलों की तरह हवा में उड़ जाएगा?”
राजेश निगम
मध्यप्रदेश, प्रदेश अध्यक्ष
भारतीय पत्रकार सुरक्षा परिषद

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