प्रबंधन व पर्यावरण विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
सोनभद्र। जिले के रेणुकूट नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित बिरला कार्बन की एक यूनिट से निकलने वाली कालिख ने स्थानीय लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। आरोप है कि कंपनी की चिमनियों से समय-समय पर कार्बन की राख वातावरण में छोड़ी जाती है, जिससे आसपास के इलाकों में प्रदूषण फैल रहा है और लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह राख बेहद हल्की होती है और हवा के रुख के साथ फैलकर घरों, पेड़ों और वाहनों पर काली परत के रूप में जम जाती है। यह परत इतनी जिद्दी होती है कि बिना पानी के तेज दबाव के साफ करना मुश्किल हो जाता है। लोगों का कहना है कि यह समस्या रोजाना नहीं होती, बल्कि महीने में एक-दो बार देर रात को इस तरह का उत्सर्जन किया जाता है, जिससे कंपनी कार्रवाई से बच निकलती है।

सुबह होते ही लोग अपने घरों और वाहनों की सफाई में जुट जाते हैं। जब निवासी शिकायत करने के लिए कंपनी प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो न तो फोन पर बात की जाती है और न ही मिलने का अवसर दिया जाता है।
इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय लोगों और समाजसेवियों द्वारा कंपनी गेट पर प्रदर्शन भी किया जा चुका है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। आरोप है कि कंपनी प्रबंधन हर बार चिमनी लीकेज या तकनीकी खराबी का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचता रहा है।
वहीं, पर्यावरण विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दशकों से चली आ रही इस समस्या पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विभाग की भूमिका पर भी संदेह गहराता जा रहा है।
निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें इस प्रदूषण से राहत मिल सके।
