इंदौर (मध्य प्रदेश) : जबलपुर से स्थानांतरित होकर इंदौर संभाग का कार्यभार संभालने वालीं नई संभागीय होमगार्ड कमांडेंट श्रीमती प्रीति बाला सिंह ने अपनी कार्यकुशलता, दूरदर्शिता और सख्त प्रशासनिक कसावट से सुरक्षा व्यवस्था को एक नया आयाम दे दिया है। हाल ही में एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने संभाग की सुरक्षा और आगामी चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी व्यापक कार्ययोजना साझा की है।
प्रमुख बिंदु एवं आगामी रणनीतिक योजनाएं:
नर्मदा तटों पर चाक-चौबंद सुरक्षा: इंदौर संभाग के अंतर्गत आने वाले आठ जिलों में माँ नर्मदा का प्रवाह क्षेत्र सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। आगामी सिंहस्थ महाकुंभ की भारी भीड़ और जल-सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ओंकारेश्वर और महेश्वर में नर्मदा किनारे विशेष वॉच टावर, प्रशिक्षण कक्ष और अत्याधुनिक आपदा राहत उपकरणों से लैस केंद्र बनाए जा रहे हैं।
24 घंटे सतर्क आपदा मोचन दल: नर्मदा तटों पर किसी भी आपात स्थिति या जल दुर्घटना से तुरंत निपटने के लिए होमगार्ड की विशेष टीमें चौबीस घंटे पूरी तरह मुस्तैद रहेंगी।
‘आपदा मित्र’ योजना: जन-सहभागिता से सुरक्षा का मजबूत कवच:
यह केंद्र और राज्य सरकार की एक बेहद महत्वपूर्ण और साझा महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सीधे आपदा प्रबंधन से जोड़ना है। इस योजना के तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं और नागरिकों को स्वेच्छा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिन्हें किसी भी संकट, दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है। इंदौर के रालामंडल में हाल ही में लगभग 900 ऐसे ‘आपदा मित्रों’ को विशेष प्रशिक्षण देकर किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने और जान-माल की क्षति को न्यूनतम करने के लिए तैयार किया गया है।
सिंहस्थ मेले के लिए विशेष टास्क फोर्स: उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर भारी संख्या में आपदा मित्रों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस विभाग के समन्वय के साथ प्लाटून कमांडर रैंक के अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जिला कमांडेंटों की सक्रियता और मैदानी कार्यशैली
इस पूरी व्यवस्था को धरातल पर उतारने में संभाग के विभिन्न जिलों में तैनात जिला कमांडेंटों की भूमिका बेहद सराहनीय रही है। मैदानी स्तर पर मुस्तैद इन जिला कमांडेंटों की त्वरित कार्यशैली, प्रशासनिक सूझबूझ और टीम वर्क के कारण ही आपदा प्रबंधन के प्रशिक्षण और राहत तंत्र को एक नई गति मिली है। चाहे जवानों का हौसला बढ़ाना हो या स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित करना, इनकी सक्रियता ने संभागीय कमांडेंट के विज़न को मजबूत आधार दिया है।
”हमारा मुख्य उद्देश्य जन-मानस में सुरक्षा का विश्वास पैदा करना और किसी भी आपदा के समय जान-माल की क्षति को न्यूनतम करना है। हमारे जिला कमांडेंटों की मैदानी मेहनत और प्रशिक्षित ‘आपदा मित्र’ इस दिशा में हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं।”
— श्रीमती प्रीति बाला सिंह, संभागीय होमगार्ड कमांडेंट
जबलपुर से इंदौर आने के बाद श्रीमती प्रीति बाला सिंह के नेतृत्व और जिला स्तर पर मिल रहे मजबूत प्रशासनिक सहयोग से इंदौर संभाग में होमगार्ड बल की कार्यशैली में एक सकारात्मक, अनुशासित और ऊर्जावान परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यह पहल न केवल मेलों और पर्वों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि आपातकाल में पूरे संभाग को आत्मनिर्भर भी बनाएगी।
राजेश निगम
(म. प्र. प्रदेश अध्यक्ष)
भारतीय पत्रकार सुरक्षा परिषद एवं अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
