इंदौर: शहर से अवैध बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स और स्वागत द्वारों को हटाने की मांग को लेकर रीगल चौराहे पर चल रहा प्रहलाद पाण्डेय और संगीता पाण्डेय का अनिश्चितकालीन अनशन आज सातवें दिन में प्रवेश कर गया है। बिना किसी टेंट के तपती धूप और खुले आसमान के नीचे जारी इस संघर्ष के बीच जब आज नागरिक नगर निगम जनसुनवाई में अपनी मांग लेकर पहुंचे और अधिकारियों से इस संबंध में बात की, तो उनकी ओर से केवल बेहद उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला : “देखते हैं, आगे कुछ करते हैं।” न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों और बार-बार के आवेदनों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इस तरह का टालमटोल वाला रवैया यह साबित करता है कि जिम्मेदार अधिकारी नियमों के पालन के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं।

महापौर से चर्चा के बावजूद जमीनी कार्रवाई का इंतजार
बता दें कि अनशन के छठे दिन इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने प्रहलाद पाण्डेय से फोन पर चर्चा कर गणेश उत्सव के दौरान लगे स्वागत द्वारों और पोस्टरों के संबंध में राय जानी थी। इस पर प्रहलाद पाण्डेय ने स्पष्ट किया था कि वे धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन:
”पहले चरण में उन बैनर, पोस्टर या स्वागत द्वारों को न हटाया जाए जिन पर केवल भगवान गणेश का चित्र है। किंतु, ऐसे किसी भी बैनर या स्वागत द्वार को तुरंत हटाया जाना चाहिए जिस पर किसी व्यक्ति विशेष का चित्र लगा हो।”
महापौर द्वारा जल्द आदेश जारी करने का आश्वासन दिया गया था, परंतु धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकारियों की इस ढुलमुल नीति से नागरिकों में प्रशासन के प्रति भारी रोष व्याप्त है।

गिरता स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता
सातवें दिन भी केवल जल ग्रहण कर अनशन पर डटे प्रहलाद पाण्डेय के स्वास्थ्य में लगातार भारी गिरावट दर्ज की जा रही है:
ब्लड शुगर: 64 mg/dL
पल्स: 97 प्रति मिनट
ब्लड प्रेशर: 120/77 mmHg
इसके साथ ही, आंदोलनकारियों के समक्ष एक बड़ी समस्या यह भी उत्पन्न हो रही है कि रात के वक्त कुछ असामाजिक तत्व आकर उन्हें परेशान करने का प्रयास करते हैं। ऐसे में खुले में चल रहे इस अनशन स्थल पर उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर विशेष ध्यान दिए जाने की अत्यधिक आवश्यकता है।

न्याय की आस में आज पहुँची जनसुनवाई, पर मिला कोरा आश्वासन
माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों तथा पूर्व में दिए गए आधिकारिक आवेदनों (जैसे आवेदन क्रमांक 3288, दिनांक 22.09.2026) पर कोई सख्त कार्रवाई न होने के विरोध में आज नागरिकों ने नगर निगम जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी बात पुरजोर तरीके से रखी। लेकिन वहां भी अधिकारियों का रवैया टालने वाला ही रहा, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या आम जनता को न्याय के लिए यूं ही सड़कों पर संघर्ष करना पड़ेगा?

प्रहलाद पाण्डेय और संगीता पाण्डेय ने इंदौर के सभी जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे इस धर्मयुद्ध और नागरिक आंदोलन को समर्थन दें, क्योंकि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शहर की व्यवस्था, सुरक्षा और कानून के सम्मान की है।
— राजेश निगम
प्रदेश अध्यक्ष,
भारतीय पत्रकार सुरक्षा परिषद एवं अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
