प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और हर साल महंगी किताबें खरीदने के दबाव पर अब लगाम लगने वाली है.

प्रयागराज : प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और हर साल महंगी किताबें खरीदने के दबाव पर अब लगाम लगने वाली है. मानवाधिकार आयोग ने साफ कर दिया है कि स्कूल चाहे सरकारी हो या प्राइवेट, बच्चों के साथ अकादमिक भेदभाव नहीं चलेगा. प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने देशभर से मिली शिकायतों के बाद सभी राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर 30 दिन में रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने यह कार्रवाई ‘नमो फाउंडेशन’ द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर की है.महंगी किताबों से मिलेगी आजादीअक्सर देखा जाता है कि प्राइवेट स्कूल जानबूझकर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवाते हैं, जो NCERT के मुकाबले 10 गुना तक महंगी होती हैं. अब आयोग ने कहा है कि कक्षा 8 तक NCERT/SCERT की किताबें ही पढ़ाई जाएं. यानी अब आपको किताबों के नाम पर हजारों रुपये लुटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आयोग ने शिक्षा मंत्रालय से भी पूछा है कि कक्षा 8 तक का सिलेबस, तय सरकारी मानकों से अलग क्यों है?

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