पट्टेदार अरुण यादव द्वारा जान बुझ कर किया जा रहा अवैध खनन जिससे भाजपा सरकार हो बदनाम

श्री महादेव इण्टर प्राइजेज में हो रहा गिट्टी / बोल्डर का अवैध खनन

सोनभद्र। जिला खनिज अधिकारी जनपद-सोनभद्र उ०प्र०, मुख्यमंत्री लखनऊ उ०प्र०, प्रमुख सचिव भूतव एवं खनिकर्म निदेशालय उ०प्र० खनिज भवन, लखनऊ उ०प्र०, राज्य स्तरीय पर्यावरण संधात निर्धारण प्राधिकरण लखनऊ उ०प्र०, निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय उ०प्र० खनिज भवन, लखनऊ उ०प्र०, क्षेत्रीय कार्यालय उ०प्र० प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लोढी जनपद- सोनभद्र, खान सुरक्षा निदेशक, वाराणसी क्षेत्र जनपद-वाराणसी उ०प्र०, उप श्रमायुक्त पिपरी जनपद सोनभद्र उ०प्र०, जिलाधिकारी जनपद सोनभद्र, श्रम अधिकारी राबर्ट्सगंज जनपद- सोनभद्र, प्रभागीय वनाधिकारी, मीरजापुर वन प्रभाग, मीरजापुर, पुलिस अधीक्षक जनपद-सोनभद्र, राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली, ए०आर०टी०ओ०जनपद- सोनमद्र को रजिस्ट्री एंव पोर्टल के माध्यम से चन्दन कुमार दुबे पुत्र स्व० ललित दूबे निवासी ओढ़ी अनपरा पोस्ट-अनपरा थाना-अनपरा सोनभद्र उ०प्र० ने मांग किया है कि श्री महादेव इण्टर प्राइजेज श्री अरूण सिंह यादव पट्टेदार द्वारा गिट्टी/बोल्डर (डोलो स्टोन) का खनन व परिवहन नियम विरूद्ध किया जा रहा है और भाजपा सरकार को बदनाम किया जा रहा है।


गौरतलब है कि श्री महादेव इण्टर प्राइजेज में सबका सिंडिकेट मेम्बर अरूण सिंह यादव पुत्र कृपा शंकर यादव निवासी सा0-10/40, मिल्लत नगर, ओबरा, थाना-ओबरा, जनपद-सोनभद्र है जिनके द्वारा गिट्टी / बोल्डर का नियम विरूद्ध उपखनिज किया जा रहा है। भूमि 4.900 हेक्टेयर के लिए स्वीकार है। दिनांक 21.09.2022 से दिनांक 20.08.2032 तक 10 वर्ष की आगामी अवधि के लिए पट्टेदार स्वीकृत है।

इस खनन पट्टे का क्षेत्र भू-खण्ड, जनपद सोनभद्र में तहसील-ओबरा अन्तर्गत ग्राम-बिल्ली मारकुण्डी के आराजी संख्या-7536ग मि० रकबा-4. 900 हेक्टेयर है एवं भू-खण्ड, जनपद सोनभद्र में तहसील-ओबरा अन्तर्गत ग्राम-बिल्ली मारकुण्डी स्थित आराजी संख्या-4949ख रकबा 5.880 हेक्टेयर, के लिए स्वीकार है। निदेशक भूतत्व एवं खनिकम्र निदेशालय, उ०प्र० खनिज भवन, लखनऊ के पत्र संख्या-2021/6/9/69941 दिनांक 12.07.2021 द्वारा अनुमोदित खनन योजना तथा राज्य स्तरीय पर्यावरण संधात निर्धारण प्राधिकरण लखनऊ द्वारा पत्रांक EC 22B001UP142385 File No. 6399 दिनांक 07.10.2022 द्वारा पर्यावरण अनापत्ति प्राप्त है।

पट्टेदार द्वारा उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली. 2021 को भंग किया जा रहा है जिसको देखते हुए तत्काल राज्य सरकार पट्टा समाप्त करे। उक्त पट्टेदार द्वारा वन अनापत्ति प्रमाण पत्र, अनुमोदित खनन योजना संख्या-2021/10/29/90204 दिनांक 02.11.2021 तथा लखनऊ के EC22B001UP184723 File No. 7149-6803 दिनांक 12.09.2022 में उल्लिखित सभी शर्तों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है तत्काल इनकी EC22B001UP184723 File No. 7149-6803 निरस्त किया जाए।

पट्टेदार पट्टा विलेख के पता के साथ छेड़ छाड किया गया है जो जान बूझकर किया गया बिना स्थगन आदेश के किया गया है। उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली, 2021 के अध्याय-5 में उल्लिखित सभी शर्तों का अनुपालन नही किया जा रहा है। गिट्टी / बोल्डर (डोलो स्टोन) (उपखनिज) का परिवहन प्रपत्र ई-एम०एम०-11 के माध्यम से नहीं किया जा रहा है। पट्टाधारक द्वारा जमा की जाने वाली प्रत्येक धनराशि के सापेक्ष नियमानुसार 2 प्रतिशत के समतुल्य धनराशि आयकर (टी०सी०एस०) के मद में एवं 10 प्रतिशत के समतुल्य धनराशि जिला खनिज फाउन्डेशन न्याय (डी०एम०एफ०), सोनभद्र के मद में एंव सीएसार तथा अन्य कर जो नियमानुसार देय है उसे नहीं जमा किया जा रहा है।

पट्टाधारक स्वयं के व्यय पर ऐसे सीमा चिन्ह को और खम्भे को तथा पट्टे से सम्बन्धित सूचना बोर्ड परिनिर्मित करेगा और सदैव अनुरक्षित करेगा और अच्छी स्थिति रखेगा, जो पट्टाविलेख से संलग्न नक्शे में दर्शाये गये सीमांकन को इंगित करने के लिए आवश्यक है जो नही किया जा रहा है। उक्त नियमावली, 2021 के नियम-35 के उपबन्धों के अनुसार अनुमोदित खनन योजना और स्वच्छता प्रमाण पत्र में उल्लिखित निबन्धनों एवं शर्तों का उल्लंघन करते हुए खनन कार्य किया जा रहा है।

उक्त नियमावली, 2021 के नियम-36 के अनुसार प‌ट्टाधारक, जिनका खनन पट्टा क्षेत्र 05 हे० से अधिक है, परिवहन के निगरानी के लिए स्वयं के व्यय पर 360 डिग्री दृष्यता रिकार्डिंग के योग्य चार सी०सी०टी०वी० कैमरा लगाने सहित एक चेक पोस्ट / गेट का निर्माण करना था जो नहीं किया गया है। पट्टाधारक उक्त चेक पोस्ट / गेट पर आर०एफ०आई०डी० स्कैनर भी रखेगा, जिससे पट्टाकृत क्षेत्र से खनिजों के परिवहन हेतु प्रयुक्त प्रत्येक वाहन के सापेक्ष निर्गत किये गये प्रपत्र ई-एम०एम०-11 पर अंकित बार कोड का डाटा पढ़ा जा सके, और उसका समुचित रूप से रख-रखाव करेगा एवं सदैव उसे चालू रूप में अनुरक्षित रखेगा जिसका पालन नहीं किया जा रहा है।

प‌ट्टाधारक उक्त सभी सी०सी०टी०सी० कैमरे गौर आर०एफ०आई०डी० स्कैनरो द्वारा की गयी समस्त रिकार्डिंग को कम से कम 30 दिन तक रखेगा और नियम 66 के उपबन्धों के अधीन यथा उपबन्धित प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष उक्त रिकार्डिंग उपलब्ध करायेगा लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। पट्टेदार स्वयं के व्यय पर उपखनिज की निकासी हेतु आवश्यक पहुँच मार्ग का निर्माण करेगा जो कि नहीं किया जा रहा है न ही पानी का छिडकाव किया जा रहा है।

खनन श्रमिको के प्राथमिक चिकित्सा हेतु खनन क्षेत्र पर First Aid Box रखना अनिवार्य होगा तथा उसके लिए शौचालय आदि का समुचित प्रबन्ध करगा जो पट्टेधारक द्वारा नहीं किया गया है। खदान से उप खनिजों के परिवहन करने वाले मार्ग पर पर्यावरण सुरक्षा का समुचित उपाय नहीं किया गया है। पट्टेदार स्वीकृत प‌ट्टा क्षेत्र के अन्दर खनन नहीं कर रहे है।

पट्टेदार द्वारा नियमावली, 2021 व खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के यथासंशोधित नियमों / धाराओं में उल्लिखित प्राविधानों तथा समय-समय पर जारी शासनादेशों एवं न्यायालय द्वारा पारिज आदेशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। वन भूमि अथवा वन स्वरूप भूमि एवं वन स्वरूप भूमि की बाहरी सीमा से 100 मीटर की परिधि के अन्दर खनन कार्य किया जा रहा है।

पट्टाधारक द्वारा खदान में निकाली स्थल पर तौल मशीन लगवाकर निदेशालय में स्थापित कमाण्ड सेन्टर में प्रयुक्त आर्टिफिशियल इन्टेलीजेन्ट युक्त सॉफ्टवेयर से इन्टीग्रेट के तौल मशीन में गड़बड़ी की गयी है। पट्टदार जिलाधिकारी, सोनभद्र द्वारा चिन्हित सुरक्षा क्षेत्रों में खनन कर रहे है।

पट्टेदार द्वारा उच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित अधिकरण अथवा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। बिना फिटनेश व बिना नम्बर के गाडीया इनके खनन क्षेत्र में चलती है। उक्ट पट्टेदार अरूण यादव समाजवादी पार्टी से विलांग करते है उनके द्वारा जान बुझकर सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसा कार्य किया जा रहा है।

महादेव इण्टर प्राइजेज अरूण सिंह यादव पट्टेदार द्वारा गिट्टी / बोल्डर (डोलो स्टोन) का खनन व परिवहन नियम विरूद्ध किये जाने का जांच कर उचित कार्यवाही करते हुए उक्त नियमावली में उल्लिखित स्वतंत्रताओं, अधिकार तथा विशेषाधिकार का प्रयोग कर दिनांक 21.09.2022 से दिनांक 20.08.2032 तक 10 वर्ष की आगामी अवधि के लिए पट्टेदार को दिया गया है उसको निरस्त करते हुए राज्य सरकार में पट्टान्तरित किया जाए।

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