नर्मदा तट पर मानवता की मिसाल: महेश्वर में पुलिस कांस्टेबल ललित कुमार बरचे के सेवाभाव ने जीते राष्ट्रीय अध्यक्ष मणिशंकर सिन्हा और पर्यटकों के दिल

वरि. पत्रकार राजेश निगम

​महेश्वर/इंदौर : भारतीय आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य के अद्भुत संगम महेश्वर की पवित्र नर्मदा नगरी में एक ऐसी मानवीय घटना सामने आई है, जिसने खाकी वर्दी के प्रति आम जनता के नजरिए को और अधिक सम्मानजनक बना दिया है। उज्जैन महाकाल और ओंकारेश्वर के दर्शन करने पधारे भारतीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मणि शंकर सिन्हा और उनके परिवार के साथ जब मैं (राजेश निगम) महेश्वर पहुंचा, तो वहां तैनात एक पुलिस कांस्टेबल की संवेदनशीलता ने सभी का दिल जीत लिया।

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​हजारों की भीड़ और श्रद्धालुओं का तांता


​हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ और चहुंओर गूंजते ‘जय बम’ के नारों के बीच अतिथिगण महेश्वर पहुंचे। छुट्टी का दिन होने के कारण नर्मदा तट पर भारी पर्यटकों की भीड़ थी। आगंतुकों की सुरक्षा और किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए पुलिस बल पूरी मुस्तैदी से तैनात था।
​यातायात व्यवस्था के चलते वाहन बहुत पहले पार्किंग में ही खड़े करने पड़े थे। लंबी पैदल यात्रा के कारण मुझे (राजेश निगम) अधिक पैदल चलने से सांस फूलने लगी और भारी घबराहट महसूस होने लगी। मेरे साथ आए अतिथि और अन्य साथी आगे दर्शन के लिए निकल चुके थे, और मैं नर्मदा तट पर अकेले खड़े होकर अपनी सेहत संभालने का प्रयास कर रहा था।

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​देवदूत बनकर आए कांस्टेबल ललित कुमार बरचे


​मुझे इस प्रकार परेशान खड़ा देख, वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिस कांस्टेबल ललित कुमार बरचे तुरंत मेरे पास पहुंचे। उन्होंने बड़े ही स्नेह भाव और आदर के साथ पूछा, “सर, आप कुछ परेशान से लग रहे हैं, तबीयत तो ठीक है?”
​मैंने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि अधिक पैदल चलने और गर्मी के कारण घबराहट बहुत बढ़ गई है। यह सुनते ही कांस्टेबल ललित बर्चे ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था की और ठंडा पानी व नींबू पानी पिलाकर मेरी सुधि ली। एक अनजान व्यक्ति और वह भी वर्दी में तैनात पुलिसकर्मी की इस असीम उदारता को देखकर मेरा दिल श्रद्धा से नतमस्तक हो गया।

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​उच्च अधिकारियों के संस्कारों की झलक


​बातचीत के दौरान कांस्टेबल ललित बर्चे ने न केवल आत्मीयता दिखाई, बल्कि अपने पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी के नेतृत्व व अच्छे संस्कारों की भी खुलकर प्रशंसा की। उन्हें यह बिल्कुल भी नहीं पता था कि उनके सामने खड़े लोग कौन हैं, फिर भी उनका कर्तव्यबोध और सेवाभाव शत-प्रतिशत निष्काम था।
​श्री ललित बर्चे को जब मेरी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान आया, तो उन्होंने नौका विहार के दौरान भी पूरा ख्याल रखा। यही नहीं, मेरी तबीयत को ध्यान में रखते हुए कांस्टेबल ने अपनी मोटरसाइकिल से मुझे सुरक्षित मेरी कार तक छोड़ा, ताकि मुझे वापस उतना ही पैदल न चलना पड़े। उन्होंने बार-बार आग्रह किया, “सर, यदि आपकी तबीयत ज्यादा खराब लगे, तो तुरंत बताएं, मैं तत्काल अस्पताल की व्यवस्था करवाता हूँ।”


​राष्ट्रीय अध्यक्ष मणि शंकर सिन्हा ने की सराहना


​भारतीय पत्रकार सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मणि शंकर सिन्हा ने इस पूरी घटना पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि महेश्वर तट पर कांस्टेबल ललित कुमार बरचे द्वारा दिखाई गई यह मानवता केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संपूर्ण पुलिस महकमे के संवेदनशील स्वरूप को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के प्रति निष्ठा और आम नागरिक के प्रति ऐसा आत्मीय व्यवहार वाकई अनुकरणीय है।
​इस दौरान एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक प्रशासनिक मुद्दा भी सामने आया इतने बड़े और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पर बुजुर्गों और दिव्यांग पर्यटकों के लिए व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव खटका। इस दिशा में स्थानीय प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है।
​कांस्टेबल ललित कुमार बरचे की यह इंसानियत और कर्तव्यनिष्ठा न केवल मेरे और राष्ट्रीय अध्यक्ष मणि शंकर सिन्हा के लिए, बल्कि वहां आने वाले हर पर्यटक के लिए एक मिसाल बन गई है। इस हृदयस्पर्शी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि खाकी वर्दी के पीछे एक धड़कता हुआ संवेदनशील इंसान भी होता है, जो हर जरूरतमंद के लिए देवदूत बन सकता है।
​व. पत्रकार राजेश निगम (मध्यप्रदेश, प्रदेश अध्यक्ष – भारतीय पत्रकार सुरक्षा परिषद एवं अखिल भारतीय कायस्थ महासभा)

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